शनिवार, अक्तूबर 02, 2010

जानना जरुरी है.

बार-बार अपने आपको समझाता हूं,
तुम्हे भी बतलाता हूं,
कि मैं परेशान नहीं हूं,
हैरान नहीं हूं.

लेकिन ये सच नहीं है.

अब, तुम जानना चाहोगे,
फिर क्या है सच?
अभी मुझे खुद नहीं पता.

खोज रहा हूं,
फोन में,
कमरे में,
पुरानी यादों में,
गंदी डायरी में,
कमरे के बाहर,
हर जगह,
हर तरफ.

मिल गया तो जरुर बताउंगा,
क्योंकि सच जानना जरुरी है.

6 टिप्‍पणियां:

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
कोटि-कोटि नमन बापू, ‘मनोज’ पर मनोज कुमार की प्रस्तुति, पधारें

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

आज कल सच मिलता कहाँ है ...अच्छी अभिव्यक्ति

Rahul Kumar ने कहा…

excellent expression!!

Fauziya Reyaz ने कहा…

mila...yaa abhi bhi khoj jaari hai???

vikas ने कहा…

fauziya..philhal khoj bnd hai.

jyoti ने कहा…

sach hota kahan hai?