शनिवार, अगस्त 16, 2008

रजत शर्मा जी,के नाम एक दर्शक का ख़त.

रजत शर्मा जी,
इन्डिया टिवी.

सर,
आप कैसे हैं? आपका काम कैसा चल रहा है? चैनल की टी.आर.पी कैसी है?

अरे, मै ये सब क्या पुछ रहा हूँ जहिर सी बात है कि इन सवालों से आपका तो कोई सरोकार ही नही होगा क्योकि भुत, शनी की दशा, इछाधारी नाग-नगीन और न जाने क्या-क्या सब तो आपके फैन हैं.



जिस खबरिया चैनल पर चौबिस घण्टे मे से बारह घण्टे भूत-प्रेत और नाग-नागिन को दिखलाया जाता हो उस चैनल और उसके मलिक पर तो इनकी असिम अनुकम्पा होगी ही, वैसे ये तोरुर खबर ब्रेकिंग न्युज) तो मिल गई थी कि आपके भुतहा चैनल पर भूतो ने अपना हाथ रख दिया है लेकिन आपके बारे मे चिन्ता हो रही थी सो ये पत्र लिख रहा हूँ.
जबावी पत्र मे अपने बारे मे जरुर लिखियेगा….

रजत जी, एक बात मै बरे दिनो से गौर कर रहा हूँ कि “आपकी अदालत” जिसमे आप वकील और जज दोनो होते हैं और कटघरे मे खरे आरोपी पर ऐसे आरोप लगाते हैं कि पुछिये मत…….

लेकिन अब इस प्रोग्राम मे बदलाव की जरुरत है……
आपको नही लगता कि बदलाव की जरुरत है ?
ऐसा कैसे हो सकता है कि आपको दर्शको के पसंद की खबर न हो…….
आप तो सबसे बड़े खिलाड़ी हैं……..
तभी तो आप सबसे ज्यादा मलिका पर आरोप लगाते हैं…..

खैर मै इन फालतू के झमेलो मे नही पड़ना चाहता…
हाँ तो, मै बतला रहा था कि इस प्रोग्राम मे कुछ बदलना चहिए…
मेरे ख्याल से अगर आप इन्सानो के बजाय भूतो पे आरोप तय करे और वो जवाब दें तो कैसा रहेगा……
मजा आ जएगा….
आप तो रातो-रात फेमस हो जायेंगे और आपका चैनल बाकी के चैनलो से बहूत उपर चला जएगा……
दर्श्क को प्रोग्राम मे नयापन दिखेगा……
भूतो का समुदाय आपको अपना सरदार मान लेगा……

और इसमे ज्याद टेंशन भी नही है अगर आपको अपने अदालत मे मल्लीका को लना होता है तो दस तरह की झीक-झीक होती है इस सोमवार तो टाईम नही है……
इस तरह के सवाल नही चलेंगे…..
ऐसा नही, वैसा नही
और न जाने क्या-क्या..

लेकिन भूतो को बुलाने मे कोई परेशानी नही….
शमशान भूमी मे वैसे ही खाली घुमते रह्ते हैँ.
वैसे भी आपके पास तो भूतो से परचित भूतकारों की एक लम्बी फौज है जो हर तरह के भूत को “आपकी अदालत” मे ला सकते हैं……

तो रजत जी, कब सजेगी अगली “आपकी अदालत”. बसब्री से इन्तज़ार है……


आपका शुभचिन्तक

2 टिप्‍पणियां:

संदीप ने कहा…

विकास रजत जी को भूत पुराण से फुर्सत मिलेगी, तभी आपके सुझाव पर ध्‍यान देंगे।

tanya ने कहा…

this is really funny and i can say pure satire